Paytm में बढ़ा भारतीय निवेशकों का दबदबा जानिए

कैसे चुनौतियों के बीच कंपनी ने वापसी कर मजबूत स्थिति बनाई

कुछ साल पहले Paytm का नाम सुनते ही लोग कहते थे "अरे यह तो डूब रही है।" RBI का एक्शन, शेयर की गिरती कीमत, चारों तरफ से आलोचना। लगता था जैसे यह कंपनी कभी उठ ही नहीं पाएगी। लेकिन आज हालात बिल्कुल अलग हैं। मार्च 2026 के अंत तक भारतीय निवेशकों की Paytm में हिस्सेदारी 50.3% हो गई है। मतलब Paytm अब बहुमत भारतीय कंपनी बन गई है। यह एक बड़ी खबर है और इसके पीछे की कहानी और भी दिलचस्प है।
पहले समझते हैं हिस्सेदारी का मतलब क्या होता है?
 सीधी भाषा में कहें तो जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो उस कंपनी में आपकी थोड़ी-सी मालिकी हो जाती है। जिसके पास जितने ज्यादा शेयर, उसका उतना ज्यादा हिस्सा। पहले Paytm में विदेशी निवेशकों का पलड़ा भारी था। लेकिन अब देसी निवेशकों यानी भारतीय म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और आम लोगों ने मिलकर 50% से ज्यादा हिस्सेदारी खरीद ली है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। यह एक-एक तिमाही में धीरे-धीरे हुआ।
किसने खरीदे सबसे ज्यादा शेयर?
इस बदलाव में सबसे बड़ा हाथ म्यूचुअल फंड्स का रहा। इनकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 14.3% से बढ़कर 16.6% हो गई। और जो फंड्स Paytm में पैसा लगा रहे हैं उनकी संख्या 36 से बढ़कर 41 हो गई। Motilal Oswal, Mirae Asset और Bandhan जैसे जाने-माने फंड्स ने और ज्यादा शेयर खरीदे। ये वो कंपनियां हैं जो आपकी और मेरी SIP का पैसा संभालती हैं। जब ये कंपनी में निवेश बढ़ाती हैं तो इसका मतलब होता है कि उन्हें कंपनी में दम नजर आ रहा है। बीमा कंपनियां भी पीछे नहीं रहीं। Tata AIA और SBI Life जैसी कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और मिलकर उनकी हिस्सेदारी 5.1% हो गई।
कंपनी का हाल कैसा है :
नंबर देखिए
अब सबसे जरूरी सवाल : क्या Paytm सच में ठीक हो रही है या बस दिखावा है? जवाब है : नहीं, यह दिखावा नहीं है। नंबर खुद बोलते हैं। दिसंबर 2025 की तिमाही में Paytm ने लगातार तीसरी बार मुनाफा कमाया। शुद्ध मुनाफा रहा ₹225 करोड़। कमाई यानी रेवेन्यू 20% बढ़कर ₹2,194 करोड़ पर पहुंच गई। EBITDA यानी मोटे तौर पर ऑपरेशनल मुनाफा ₹156 करोड़ रहा और मार्जिन 7% रहा। और सबसे अच्छी बात कंपनी के साथ जुड़े दुकानदारों और व्यापारियों की संख्या 1.44 करोड़ को पार कर गई। यह पिछले साल से 24% ज्यादा है। मतलब देश के छोटे-बड़े बाजारों में Paytm की मशीनें और QR कोड तेजी से फैल रहे हैं।
“वैश्विक विशेषज्ञ भी अब कंपनी के प्रदर्शन से प्रभावित नजर आ रहे हैं"
सिर्फ भारतीय ही नहीं, विदेशी विशेषज्ञ भी अब Paytm को अलग नजरिए से देख रहे हैं। अमेरिका का बैंक Bank of America ने Paytm के शेयर पर 'खरीदो' की रेटिंग दी है और ₹1,380 का लक्ष्य तय किया है। उनका कहना है कि Paytm व्यापारियों से पैसा कमाने के मामले में आगे निकल रही है। Bernstein नाम की एक और बड़ी विश्लेषण कंपनी ने भी कहा कि Paytm अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से लगभग दोगुना कमाती है और वो भी जब दोनों के पेमेंट वॉल्यूम लगभग बराबर हैं। यह Paytm की असली ताकत है। यह बदलाव आम निवेशक के लिए क्या मायने रखता है?
अगर आप Paytm में निवेश सोच रहे हैं या पहले से शेयर लिए हैं, तो यह जानना जरूरी है। जब बड़े-बड़े म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां किसी कंपनी में निवेश बढ़ाती हैं, तो इसका एक सीधा असर होता है शेयर में स्थिरता आती है। ये संस्थाएं लंबे समय के लिए पैसा लगाती हैं, इसलिए अचानक घबराहट में बेचती नहीं। इसके अलावा अब कंपनी पर भारतीय नियंत्रण ज्यादा है, जो एक तरह से देखें तो कंपनी की दिशा और फैसलों में भारतीय सोच की भूमिका बढ़ेगी।
निष्कर्ष :
Paytm ने यह साबित किया है कि बुरे वक्त में भी अगर कंपनी अपना काम सही करती रहे, तो भरोसा खुद-ब-खुद वापस आता है। लगातार तीन बार मुनाफा, बढ़ता व्यापारी नेटवर्क, घरेलू संस्थाओं का बढ़ता विश्वास और विदेशी विशेषज्ञों की तारीफ ये सब मिलकर एक सकारात्मक तस्वीर बनाते हैं। लेकिन याद रखें डिजिटल पेमेंट का बाजार बहुत तेज और प्रतिस्पर्धी है। आगे की राह आसान नहीं होगी। इसलिए किसी भी निवेश से पहले सोच-समझकर फैसला लें और जरूरत हो तो किसी जानकार से सलाह लें। फिलहाल Paytm की यह नई पहचान "अब यह हमारी अपनी कंपनी है" निश्चित रूप से एक अच्छा संकेत है।